Cyclone Biparjoy in India: बिपरजॉय के संबंध में सभी लोग डरे हुए हैं. इसलिए, गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ तटों सहित कई क्षेत्रों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी की गई है. एक गंभीर चक्रवाती तूफान के पास आने की संभावना 15 जून शाम तक जखाऊ बंदरगाह क्षेत्र के लिए जताई गई है. केंद्र और राज्य सरकार द्वारा प्रयासों के परिणामस्वरूप, तटों के आस-पास बसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा है. अब तक 37,000 से अधिक लोगों को निकाल लिया गया है.
बिपरजॉय ने 1998 में गुजरात में आए एक चक्रवाती तूफान की याद दिला दी है. उस समय, 8 जून को ऐसा ही चक्रवात आया था, जिसने देशभर में 10,000 से अधिक लोगों की जान ले ली थी और 1500 से अधिक लोगों को घायल कर दिया था. तांडवपूर्ण तूफान के कारण हवाएं उस समय 165 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थीं. इससे स्पष्ट है कि जो भी इस तूफान के पथ में आया होगा, उसकी तबाही हो गई होगी. वहाँ की स्थिति इतनी भयानक थी कि अस्पतालों में लाशों के ढेर पड़ गए थे. तूफान ने कच्छ के कांडला पोर्ट और उसके आस-पास क्षेत्रों में तहस-नहस कर दिया था.
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गोमती घाट, शिवराजपुर समुद्र तट, बेट द्वारका और अन्य तटों पर टूरिस्ट और स्थानीय लोगों को जाने की अनुमति नहीं है. क्षेत्र के मछुआरों को 5 दिनों तक तट से दूर रहने की चेतावनी दी गई है। इस दौरान, रेलवे ने कुछ ट्रेनें रद्द कर दी हैं. प्रधानमंत्री मोदी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और अधिकारियों को हरसंभव मदद करने और सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं. एनडीआर और एसडीआरएफ की टीमें तैनात की गई हैं. यह तैयारियों का तरीका साफ़ता देता है कि चक्रवात कितना भयानक हो सकता है.
गुजरात में साल 1990 के बाद 5 बड़े तूफान
इस चक्रवाती तूफान ने केवल गुजरात में ही 1173 लोगों की जानें ले ली थीं, जिसका महत्वपूर्ण स्मरण 1998 में होने वाले विनाशकारी चक्रवात के कारण लोगों में जाग्रति पैदा करता है. इसलिए सरकार किसी भी प्रकार की गलती से बचना चाहती है. इस बार, एक और गंभीर चक्रवाती तूफान गुजरात को पार करेगा, जिसे पंचम अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान के रूप में भी जाना जाता है. इसे जून महीने में अरब सागर से उठने वाला तीसरा ऐसा चक्रवाती तूफान है, जो 58 सालों में घटित होता है. आईएमडी के साइक्लोन एटलस में इसके अनुसार, 1891 के बाद से गुजरात में केवल पांच ऐसे गंभीर श्रेणी के चक्रवाती तूफान (हवा की गति 89 से 117 किलोमीटर प्रति घंटा) आए हैं, और ये सभी चक्रवाती तूफान जून महीने में ही हुए हैं, विशेष रूप से 1900 के बाद. यह भीषण तूफान 1920, 1961, 1964, 1996 और 1998 में भी आए थे.