Sengol History: देश के इतिहास में 28 मई, का दिन स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा. नए संसद भवन के उद्घाटन के अवसर पर पीएम मोदी ने लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी के बदल में पवित्र सेंगोल को स्थापित किया. इस दौरान तमिलनाडु और देश के विभिन्न हिस्सों से आए पंडितों ने मंत्रोच्चारण किए. इससे पहले पहले बीचे शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी के आवास पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. इस कार्यक्रम में तमिलनाडु से आए महंथों और पंडितों ने प्रधानमंत्री को राजदंड (सेंगोल) सौंपा था. आइए जानते हैं कि पवित्र संगोल का इतिहास क्या है.
पौराणिक प्रमाणों के मुताबिक सेंगोल का इतिहास बेहद पुराना है. दरअसल यह सोंगल तमिल संस्कृति की विरासत का हिस्सा है. जिसे ब्रह्मांड भी कहा जाता है. जबकि तमिल भाषा में इसे सेंगोल कहा जाता है और हिदीं में राजदंड के नाम से पुकारा जाता है. यह ऐतिहासिक सोंगोल देश की संसद भवन में स्पीकर की कुर्सी के समीप स्थापित किया गया है.
5000 साल पुराना है सेंगोल का इतिहास
बता दें कि इस ऐतिहासिक और पवित्र सेंगोल को सत्ता हस्तांतरण के प्रतीक के तौर पर जाना जाता है. जिसे देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को सौंपा गया था. उस वक्त यह समझ गया था कि अंग्रेजों ने अपनी सत्ता का हस्तांतरण कर दिया है. 15 अगस्त, 1947 की भावना को दोहराते हुए ठीक वैसा ही समारोह 28 मई को नई दिल्ली में संसद परिसर में दोहराया गया. इस मौके पर तमिलनाडु के कई आधीनमों के महंथ उपस्थित थे. राजदंड की स्थापना से पहले उसे गंगाजल से अभिषिक्त किया गया. जिसके बाद सेंगोल को एक पवित्र प्रतीक के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपा गया. इसे 5000 साल पुराने महाभारत काल से भी जोड़ा जाता है. कहा जाता है कि कि सेंगोल को राज्याभिषेक के समय युधिष्ठिर को दिया गया था.